हमारी नन्ही परी

हमारी नन्ही परी
पंखुरी

Monday, November 1, 2010

Down the memory lane...

दिन है सुहाना, आज पहली तारीख है. आज से शुरू हो रहा है नवंबर महीना.अगले महीने यानी दिसंबर की बीस तारीख को पंखुरी का सेकेण्ड बड्डे होगा , ये तो आपको पता ही है. तो हमने सोचा है कि क्यों न हम बेटी के दोस्तो के साथ उनकी कुछ वो मस्तियाँ बाँटे जो हमने कैमरे में कैद तो की थी मगर किसी वजह से उसी वक्त आपसे शेयर नहीं कर सके थे.अब उनके जन्मदिन तक हम कुछ-कुछ ऐसे ही फ़ोटोज़ आपसे शेयर करेंगे. 
 इस बार वो फ़ोटोग्राफ़्स, जो हमने पिछ्ले अक्टूबर यानी एक साल पहले खींचे थे. कुल जमा दस महीने की थीं मैडम, लेकिन दस का दम तो देखिये, बदमाशियों में कहीं कोई कमी नहीं थी.और हमेशा की तरह हम इन्हीं अदाओं पर फ़िदा थे.........
दो दतुलियाँ आ चुकी थीं..., सो क्यूट !

कजरारी ज़ुल्फ़ें भी तब हुआ करती थीं
चाचू की गोद मे गुडिया...
रसगुल्लाऽऽऽऽऽऽऽऽ
बाँसुरीवादन..., सुनेंगे क्या ? ही-ही-ही
किन्नी प्यारी...............

कोई देख रहा है क्या ?
शोनाऽऽऽऽऽऽ
हँस दी..........
गोलगोल है, भई सब गोलगोल है......
हीरे-मोती सी आँखों में छुपी शरारत

 ओ रे बाबा , बिटिया इत्ती हैरान क्यों ?
मैं हूँ पंकुली !!!!

5 comments:

  1. रसगुल्ला ...हा हा हा ...बहुत मिष्टी है

    ReplyDelete
  2. पंखुरी....तुम्हारी सारी फोटोस बहुत सुन्दर है :)
    प्यार
    अनुष्का

    ReplyDelete
  3. प्रेम से करना "गजानन-लक्ष्मी" आराधना।
    आज होनी चाहिए "माँ शारदे" की साधना।।

    अपने मन में इक दिया नन्हा जलाना ज्ञान का।
    उर से सारा तम हटाना, आज सब अज्ञान का।।

    आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!
    --
    आपकी प्यारी सी पोस्ट की चर्चा
    बाल चर्चा मंच पर भी है!
    http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/11/27.html

    ReplyDelete