हमारी नन्ही परी

हमारी नन्ही परी
पंखुरी

Monday, January 17, 2011

पंखुरी निकली घूमने !

लगभग एक महीने की ठंड और पिछले लगभग पन्द्रह दिनों की घनघोर ठंड के बाद जब सूरज दादा ने वापस अपनी ड्यूटी पूरे ज़ोर-शोर के साथ ज्वाइन कर ली तो पंखुरी बेटी का भी बाहर निकल कर घूमने का प्लान बन गया. प्लान बनाया बेटी की बुआ ने. संडे को बुआ की छुट्टी और पंखुरी के घूमने के लिये अनुकूल मौसम दोनों ने साथ दिया और बिटिया चल दी घूमने. आप भी देखिये ------

अरे ये क्या ? बीच में पापा ने भी बिटिया को ज्वाइन कर लिया ! वेरी गुड ....
दूर से देख कर तो बेटी खूब खुश हुईं पर इस ट्रेन में लाख मनाने पर भी बैठी नहीं....
पता है इस आउटिंग में बेटी ने क्या खाया मतलब चाटा ...? सिर्फ़ टोमेटो केचप..... !
इस फ़ोटो में पंखुरी को ढूँढिये तो ज़रा..........
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Saturday, January 8, 2011

pankhuri is enjoying winters ! (two)

अभी तो पंखुरी बेटी छोटी हैं लेकिन पापा ने प्रोमिस किया हैं कि जब वो थोडी बडी होगीं तो उन्हें ले कर हिल स्टेशन जायेंगे. उससे पहले ही बिटिया को इस बार अपने ही शहर में हिल स्टेशन का मज़ा लेने का मौका मिल गया जब टेम्प्रेचर तीन डिग्री तक पहुँच गया. इस मौसम में बेटी का पहनावा देखिये तो...


चाचू-बेटी-बुआ
अरे बाबा, हम शिमला में नहीं अपने घर में है...! ही-ही-ही

Friday, January 7, 2011

pankhuri is enjoying winters ! (one)

बिटिया के शहर यानी बनारस में इस समय कडाके की ठंड पड रही है और पंखुरी इस मौसम का पूरा आनंद ले रहीं हैं. पिछले साल तो इस समय वो बस गोद में ही रहा करती थीं और उनकी सारी शरारतें बिस्तर की परिधि तक ही सीमित रहती थीं. बहुत छोटी जो थीं... लेकिन इस बार तो वो हर मुमकिन तरीके से सर्दियों का मज़ा ले रही हैं घर में भी और बाहर भी... ! इस मौसम में बाबा अक्सर मटर लेकर आ जाते हैं. खूब सारी मटर... एक किलो-दो किलो-पाँच किलो... और फिर बनती है मटर की पूडी, चूडा-मटर, मटर-पनीर, मटर की भुजिया... आ गया न मुँह में पानी.... सर्दी के मौसम का यही तो मज़ा है. लेकिन बिटिया को ये सारी डिशेज़ खाने में मज़ा नही आता, उनका तो आनंद है मटर की फली छिलवाने में... अरे भाई इतनी सारी मटर अकेले कोई भी कैसे छील सकता है ? इसलिये पंखुरी मटर छीलने में सबकी खूब मनोयोग से मदद करती हैं. अब वो मटर कितनी छीलती हैं, ये मत पूछिये..., बस इतना जान लीजिये कि अब घर में सबने मान लिया है कि बिना पंखुरी बेटी की मदद लिये मटर छीलना एकदम ही असंभव काम है ( क्योंकि बिना अपनी मदद दिये, वो किसी को मटर छीलने देगीं तब न ..... हा -हा-हा ) !
मटर छीलते समय बिटिया की तन्मयता आप खुद ही देख लीजिये... हाथ कंगन को आरसी क्या !!!

देखा आपने ...बिटिया ने कितनी सारी मटर छील डाली... अगर आपका मन भी मटर की डिशेज़ खाने का कर रहा हो तो फ़टाफ़ट बिटिया के घर पहुँच जाइये !

Tuesday, January 4, 2011

Pankhuri is back on her blog with lots of exciting news, GAPSHAP and MASTI

पिछले लगभग डेढ़ महीनों से पंखुरी बेटी के ब्लॉग पर कुछ ख़ास नहीं हुआ . वैसे इसमें बिटिया की कोई गलती नहीं थी . ना ही बिटिया के कारनामों, शरारतों और मस्ती में कुछ कमी थी बल्कि वो सब तो पूरे जोर शोर से जारी था लेकिन पंखुरी टाइम्स का संपादक मंडल (यानी बिटिया की बुआ...  ही-ही-ही) थोडा बिज़ी था और इसी व्यस्तता में बहुत सारी बातें बिटिया अपने दोस्तों से शेयर नहीं कर सकी . लेकिन वो सारा डाटा सुरक्षित रखा गया है ताकि उसे बाद में सबके साथ बाँटा जा सके . 
... और अब न्यू इयर में फिर से नए जोशोखरोश के साथ पंखुरी टाइम्स आपके पास आ गया है.
सबसे पहले बात की जाये पिछले महीने के सबसे ख़ास इवेंट की और वो था बिटिया का सेकेण्ड बर्थडे यानी बीस दिसंबर .
आप सबको तो पता ही है बिटिया और घर के सभी लोग बहुत पहले से ही इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और जब ये ख़ास दिन आ गया तो सभी ख़ुशी से झूम उठे . ये रही बेटी के बर्थडे की फ़ोटो-रिपोर्ट -


सुबह - सवेरे नहा धो कर बेटी ने सबसे पहले अपने झूले का आनंद लिया...
शाम होते ही पंखुरी के फ्रेंड्स अपनी विशेज़ और गिफ्ट्स के साथ आने लगे .
क्राउन लगाये बेटी एकदम राजकुमारी सी दिख रही थी ....
ये क्राउन बुआ ने स्पेशियली बेटी के बर्थडे के लिए ख़रीदा था...
हमारी प्रिन्सेज़ झूले पर , अपने फ्रेंड्स के साथ  ...
फिर सबने बेटी को अपना आशीर्वाद दिया ...
सरिता बुआ , बिटिया को मंगल तिलक लगते हुए ....
फिर आया वो पल जिसका सबको इंतजार था , जल उठी केक की कैंडल्स ...
सबने तालियाँ बजाकर गाया...हैप्पी बर्थडे टू पंखुरी 
पंखुरी ने बाबा की गोद में बैठ कर केक काटा ...
सबकी फ़ोटो खिंची ...
बेटी.... बुआ संग  ...
पंखुरी , बाबा की गोद में ...
ये रहा बेटी का बर्थडे केक ... सो यम्म्मी ......
बुआ - बेटी
भोला सा चेहरा - आँखों में शरारत ... बूझो तो कौन ?   अरे बाबा पंखुरी बेटी और कौन .... !
हमारी शहज़ादी को ...
जीवन की सारी खुशियाँ मुबारक हों .... अमीन !