हमारी नन्ही परी

हमारी नन्ही परी
पंखुरी

Monday, March 26, 2012

A new world is waiting for Pankhuri Beti

Now ...only 1 day to go.......परसों यानी २८ मार्च से पंखुरी की नयी दुनिया का आग़ाज़ होगा...नयी-नयी रंग-बिरंगी स्टेशनरी और ड्रेस आ चुकी है.स्कूल बैग तैयार हो रहा है....बुक्स पर कवर चढ़ाये जा रहे हैं..बिटिया को समझ में आ चुका है स्कूल में उन्हें बहुत देर तक पापा-मम्मी-बुआ-चाचू और बाबा के बिना रहना होगा फिर उसके बाद .....

बिटिया खुद सबको बता रही हैं कि '' फिल पापा आयेंगे हमें घर ले कल   जायेंगे.''  
आज हमने सोचा है कि इससे पहले कि पंखुरी बेटी स्कूल जाना शुरू करें क्यों न हम उनकी बनाई वो सारी ड्राइंग्स आप सबसे शेयर कर डालें जो बेटी ने स्कूल जाने से पहले ही बना लीं हैं .इनमें वाटर कलर, पेन्सिल कलर , स्केच कलर इस्तेमाल किये गए है... थोड़ी बहुत मदद बुआ की और सारी इमेजिनेशन और मेहनत बेटी की....

ये पहली बार पंखुरी ने वाटर कलर यूज़ किया था ...बस यूं ही से स्ट्रोक्स लगाये  और  देखिये कुछ-कुछ  मशरूम जैसी  शक्ल बन  गयी ...है न....
सच है ..कल्पना का साथ हो तो सब संभव है :-)
ड्रा किया बुआ ने कलर किया पंखुरी ने....
ज़रा स्ट्रोक्स की सफाई तो देखिये...
इस फोटो में दिख रहे हैं बैट, बाल, साइकिल, और चोटी वाला बाबू...
( बाबू को बनाया पापा ने )



वाटर कलर से बनी सीनरी...आउट लाइन बनायीं बुआ ने...
कलर किया  बेटी ने...
रात के समय आकाश में ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार्स...और बदली
 में छुपे चंदा मामा... (ये छुपने वाला इफेक्ट तब आ गया जब बेटी वाटर कलर को इरेज़र से मिटने की कोशिश कर रही थीं...ही-ही-ही.)


मैन्गोज़ छोटे-बड़े 
पानी में पीकोंक.... कभी देखा था पहले :-D

orange घेरे में इन्सी-विंसी स्पाइडर.....दिखा क्या ???

ये पंखुरी ने बनाया है बाबू.....

है न मज़ेदार.... और हाँ सनद रहे की नन्ही पंखुरी की ये कलाकारी उनके स्कूल जाने से बहुत पहले की है !!!
:-D

Sunday, March 25, 2012

तैयारी ज़ोरों पर चल रही है...

ज्यों-ज्यों २८ मार्च का दिन करीब आ रहा है हमारी तैयारियों की स्पीड तेज़ होती जा रही है...सबसे  बड़ा टास्क है बेटी को सुबह पांच बजे जगाना ...ओह ये तो बड़ी ही बुरी है भाई ...अभी तक तो हमारी राजकुमारी जब जी चाहे सोती-जगती थीं और अब...सुबह-सुबह अलार्म की आवाज़ पर जागना होगा ...बेटी को ही नहीं घर भर को ....और प्रेक्टिस शुरू हो चुकी है... बेटी को सुबह उठा कर बाबा योग के लिए ले जा रहे हैं, फिर पापा बेटी को मोर्निंग वाक पर ले जा रहे हैं, बढ़िया बात ये है कि बेटी उठने में भले ही देर करें लेकिन उठने के बाद पूरी एनर्जी के साथ एन्जॉय कर रही हैं. 

आज हम आपसे शेयर करने जा रहे हैं बेटी की वो फ़ोटोज़ जो उन्होंने स्कूल में खिंचवाई थी ....हाँ भई स्कूल में...अपना एडमीशन करवाने पंखुरी बेटी स्कूल खुद ही गयीं न ...तभी बुआ ने .....यानी हमने.... बिटिया की कुछ प्यारी-प्यारी फ़ोटोज़ खींचीं ...आप सब से शेयर करने के लिए ...देख लीजिये आप भी कि बेटी नाम लिखे जाने से पहले ही अपने स्कूल जाकर कितना ख़ुश हुईं ............   









Monday, March 19, 2012

A new dream is waiting for PANKHURI BETI

आखिर वो दिन  ही पहुंचा है जिसका हम सबको न जाने कब से इंतज़ार था.बस कुछ ही दिन बाद ( २८ मार्च ) से नन्ही बिटिया स्कूल जाएगी . एडमिशन हो चुका है . सारी औपचारिकता धीरे-धीरे पूरी हो रही हैं ..पूरे जोश-ओ-ख़रोश के साथ.
नयी-नयी यूनिफ़ॉर्म...नया स्कूल बैग...नयी बुक्स...पेन्सिल बॉक्स...टिफिन बॉक्स...वाटर बोटल...और भी जाने क्या-क्या...
और बिटिया के उत्साह के तो कहने ही क्या...वो तो छः महीने पहले यानी ढाई साल की उमर से ही कूल जाने का इंतज़ार कर रही हैं.

अब जब ऐसा होने ही वाला है तो मन में जाने कैसे-कैसे ख़याल उमड़-घुमड़ चले आ रहे हैं.हम सबकी लाडली , घर भर को अपनी मासूम खिलखिलाहट और शरारतों से गुलज़ार रखने वाली हमारी नन्ही परी पहली बार बाहर की दुनिया से रिश्ता बनाने जा रही है ...वो पहला कदम जो बेटी को उसकी मंजिल की ओर ले जायेगा.अपनी पहली क्लास में बिटिया यूं तो पहला साल खेल-कूद में बिताएंगी ( प्ले ग्रुप जो है ) लेकिन वो उनके स्कूल का पहला साल भी तो होगा जो बिला शक बेहद महत्वपूर्ण होगा.
 सोच कर ही अजब एहसास से मन भर सा जाता है कि अब से  बिटिया  की भी अपनी दुनिया बनेगी ...उसके अपने सपनों की, उम्मीदों की, परिचितों की, दोस्तों की प्यारी सी दुनिया...वही दूसरी ओर मन ये सोच कर थोड़ा घबरा भी जाता है कि अब से हमारी नन्ही पंखुरी की जिंदगी में एक नयी चीज़ का आगमन होगा जो धीरे-धीरे उसे समझदार और परिपक्व बनता जायेगा और वो है - ज़िम्मेदारी...

ज़िम्मेदारी ....एक नए तरीके से सबकुछ समझने की. अब तक हर काम अपनी मर्ज़ी से करने करवाने की आदी  हमारी राजकुमारी को अब से एक नियम से जागना होगा-सोना होगा,पढना होगा,बिना इच्छा के भी कुछ काम निपटने होगें, अपने मन की छोड़ दूसरों के मन का करना भी सिखाना होगा....और फिर........
फिर सुच्चे मोती सी सच्ची पारदर्शी हमारी नन्ही को शायद वक्त ज़रूरत पर सच के ऊपर झूठ को तरजीह देना भी सीख ही लेना होगा...भगवान करे ये होने में बहुत साल लगें लेकिन ये तो सच है ही कि इसकी शुरुआत का वक्त वही होगा जब से वो बाहरी दुनिया के संपर्क में आएगी....

अब तक हर पल हमारी निगहबानी में ओस की बूँद सी सुरक्षित रहने वाली बेटी को घंटों हम सबकी नज़रों से दूर उन लोगों के साथ रहना भी सीखना होगा जिन्हें वो जानती-पहचानती नहीं...फिर वही से जान-पहचान के नए सिलसिले बनाने होगें.

जाने कितनी नितांत उसकी अपनी परेशानियां, संघर्ष,सवाल और चिंताएं भी उसके साथ लग लेंगी.ओह ....सोच की गति तो बेलगाम होती जाती है...मगर लगाम तो लगनी होगी...दिन पखेरू से उड़ते जाते हैं और हमें हर दिन का नए उत्साह से स्वागत करने के लिए तैयार होना ही चाहिए....

बस इतना हो कि हमें बेटी के नए सफ़र में कदम-दर -कदम उसका साथ देने की क्षमता,योग्यता, सामर्थ्य और साहस ईश्वर देता रहे....

आमीन !11






Wednesday, March 7, 2012

पंखुरी बोली - होली है भाई होली है !!!

जीहाँ ! एकदम स्पेशल वाली होली है ये तो .....पंखुरी बेटी को याद रह जाने वाली पहली होली ....पिछली बार बेटी इतनी छोटी थीं कि उन्हें कुछ याद नहीं लेकिन अब की बार तो बेटी सब पता है और पिछले कई रोज़ से सबसे कह रही हैं - होली है होली ....

बाबा की लाई पिचकारी तोड़ी जा चुकी है अब पापा की लाई पिचकारी से मस्ती हो रही है...
 
 
 
 
 
ये रही इस Holi पर पंखुरी बेटी की लाल रोली लगी  नन्ही हथेलियों की  छाप









हैप्पी होली पंखुरी बेटी के सभी दोस्तों को....!!!
रात के तकरीबन साढ़े बारह बज रहे हैं. मैं अपने कुछ ज़रूरी काम पूरे करने की कोशिश में हूँ और नन्ही बेटी पंखुरी मेरे इर्द-गिर्द चक्कर काटे जा रही हैं .नींद  उनकी आँखों से कोसों दूर है . सोने की हिदायत देने पर कहती हैं -

'' आज मेला छोने का मन नहीं कल लहा है कल छुबा छोयेंगे...अभी बुआ 
छात खेलना है...''
मेरा कोई तर्क, समझाइश या डांट काम नहीं कर रही है...
हम बड़ों की भी चिंता दरअसल कल की नहीं २८ मार्च की है जब पंखुरी पहले दिन अपने स्कूल जाएँगी ....रिपोर्टिंग  टाइम - सुबह ६:४५ ..... अब तक अपनी मर्ज़ी से सोने-जागने वाली हमारी  गुड़िया को उसके बाद एक नियम के तहत घडी की सुइयों के साथ उठाना-जागना-चलना सीखना होगा.

हम सब इन्हीं सब बातों को लेकर परेशान हैं लेकिन पंखुरी को इन सब से क्या वास्ता वो तो अपनी मासूम  शरारतों में व्यस्त हैं...


चलिए इन बातों को हम bhi कुछ पलों के लिए अलग रखते हैं और आपसे शेयर करते हैं बिटिया kee क्रियेटिविटी के कुछ sundar पल....इन तस्वीरों के माध्यम से ...





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है न हमारी आर्टिस्ट बेटी की मनभावन अदा ....! 

Friday, February 17, 2012

Pankhuri ka third BIRTHDAY

हमने कहा था कि अगली पोस्ट जन्मदिन की तस्वीरों के साथ होगी और लीजिये हमने अपने वादे को पूरा कर दिया ...ये बात और कि पूरे दो महीने बाद....पंखुरी बेटी का जन्मदिन बीस दिसम्बर को था न...!


लेकिन चलिए देर आये मगर दुरुस्त आये...
ये पोस्ट आज और अभी डालने के पीछे एक बहुत ही बड़ा और विशेष कारण है जो हम आपको बाद में बताएँगे पहले आपसे बेटी के बड्डे की फ़ोटोज़ तो शेयर कर लें.........















wow.......... great न .........
और अब जल्दी से वो बहुत-बहुत स्पेशल बात जिसे आप सब से शेयर करने के लिए आज सारे काम दरकिनार कर हम हाज़िर हैं...
और वो बात ये है कि ..........
कल यानी अठारह फ़रवरी २०१२ को पंखुरी बेटी अपने स्कूल में एडमिशन टेस्ट देने जा रही हैं.....एक सप्ताह पहले बेटी ने पापा के साथ जा कर अपना फॉर्म जमा किया था तभी अपने स्कूल में फिशेज़ और झूले देख कर खूब खुश हुयीं थीं और अब कल बेटी ही नहीं हम सबकी लाइफ़ के बेहद स्पेशल दिन अपना पहला official  टेस्ट देने जा रही है बिटिया.....
है न .......बहुत ख़ास बात....
तो आप सबकी भी विशेज़ चाहिए पंखुरी को.........
:-D