हमारी नन्ही परी

हमारी नन्ही परी
पंखुरी

Friday, October 7, 2011

A Fresh, Bright & Tasty Sunday Morning !!!

आपको पता है..... पिछले एक महीने से पंखुरी बेटी सन्डे मोर्निंग उठते ही पापा से क्या फ़रमाइश करती हैं ? 
नहीं .........
तो सुनिए बेटी की पहली फ़रमाइश होती है 
'' पापा जब्ली बाई   काना है ...''
कुछ समझे ????
इसका मतलब है.....
'' पापा जलेबी खानी है ...'' ही-ही-ही
अब भई...बेटी की भाषा समझने के लिए इतनी अक्ल तो लगानी ही पड़ेगी. है कि नहीं....!
... तो इस सुबह भी यही हुआ. बिटिया की फ़रमाइश सुनते ही पापा फटाफट गरमागरम जलेबियाँ लेकर आये. 
इस सन्डे चाचू बेटी के लिए अनार भी लेकर आ गए थे तो थोड़ी देर बाद बेटी ने अनार का भी स्वाद लिया.... 

Have a look


वाओ.. गरमागरम जब्ली बाई आई मीन जलेबियाँ ....
यम्मीईईईईई..... देखिये तो 
बेटी कितने मज़े लेकर खा रहीं है...
ये आया कुछ और...
टेस्टी - टेस्टी....रेड-रेड...अनार ..........
ये चम्मच में उठाया ....
और ये गया मुंह में .......


पंखुरी के घर कुमारी-पूजन

शारदीय नवरात्रि की नवमी की सुबह बेटी के लिए बहुत स्पेशल थी . घर में कुमारी-पूजन जो था. पिछले दिन से ही तैयारी चल रही थी. लेकिन बेटी को क्या पता....?
उन्हें तो कुछ स्पेशल होने का अहसास तब हुआ जब सुबह-सुबह नहा कर घर की सरगर्मी पर गौर फ़रमाया.फिर कुछ ही देर में जब बिटिया की सहेलियां आने लगीं तो उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा...और दरअसल तब ही उन्हें कुछ स्पेशल होने का पता चला :-)
पंखुरी बिटिया ने तुरंत सबको इन्फ़ोर्म किया -
'' आज मेला एप्पी बददे है '' 

हाँ भई...बेटी ने  इतने सारे दोस्तों की भीड़ एक साथ तो बर्थ डे पार्टीज़ में ही देखी थी अभी तक.
कुछ भी हो.... मज़ा आ गया....
नन्ही बेटी और उनकी सखियों ने भोग लगाया और हम नव देवियों को  जिमा के पुण्य के भागी बने. 


पूजन 
बुआ ने बेटी को ....
तिलक लगाया.....और
और आरती उतारी... 
देवी तैयार ......भोग लगाने को....!


गुप-चुप...गुप-चुप....




रानी बिटिया ......गुड गर्ल !!!

पंखुरी बेटी जब एक साल की भी नहीं हुईं थीं तभी से उन्हें हर काम अपने आप करना होता था फिर अब तो वो बड़ी हो रही हैं.अब तो उनकी समझदारी और स्वावलंबन और भी ज्यादा हो गया है.


पता है...अब तो बेटी अपनी दवाइयां भी खुद ही पीने लगी हैं वो भी बिना रोये-धोये ..... आप खुद ही देख लीजिये न.....




ये बेटी की दवाई है येल्लो.......और पिंक वाली.....
ये उठाया ......
....और ये मुंह में गयीईईईईई..... 
ऊँहू......तीत्ताआआआआ (मतलब इसका टेस्ट अच्छा नहीं है)
अब इस ब्लैक वाली की बारी.........
बेटी को इसका टेस्ट पसंद है.....पापा ने बोला कि ये आयरन है...
वाओ.... मीथा-मीथा  आयरन...
रानी बिटिया ......गुड गर्ल !!!

Tuesday, October 4, 2011

पंखुरी बेटी हुई बातों की पिटारी !!!

जीहाँ ....पंखुरी बिटिया की बातों के फूल  अब सारे घर को हर घड़ी महकते रहते हैं....और बातें क्या....बातों की लड़ियाँ...बातों की फूलझड़ियां कहीं जाए तो बात बने...! सुबह से रात तक बस बात ही बात ...! 
अभी बस कल की ही बात है , कुछ महीने पहले तक बिटिया की तोतली ज़ुबान समझने में हमें काफी अक्ल लगनी पड़ती थी लेकिन पिछले तक़रीबन दो महीने से पंखुरी बेटी चैटर बॉक्स हो गयी हैं और बेहद समझदार भी...! 
सुबह बाबा , पापा,चाचू , और बुआ के ऑफिस निकलने का वक्त और बेटी का सवाल - '' मेले लिए का लाओगे ?''
फिर खुद ही जवाब भी - '' तोपी लाना ...'' फिर हिदायत...- '' दल्दी (जल्दी) आना....'' इतना ही नहीं शाम को सबके लौटने पर उनका पहला सवाल - '' मेले लिए का लाए हो ''

एक शाम बुआ ने कहा - ''पंखुरी एक गाना तो सुनाओ...''
बेटी बोली - '' हमको नहीं आता है...बुआ को आता है...बाबू (पंखुरी) छोता है...''

एक रात सब खाना खाने बैठे थे .....पापा की थाली आने में थोड़ी देर थी , पंखुरी ने चिंता से पूछा - '' मेले पापा का खाना काँ (कहाँ) है ? फिर पापा का खाना आने पर ही खुद खाना शुरू किया.

अभी कुछ दिन पहले बेटी के चाचू को पैर में चोट लग गयी .
 बेटी चिंता भरे स्वर में सबको बतातीं रहीं - '' चाचू को छोत लग गयी है.बाइक छे गिल गए.'' कोई पूछता कि अब पंखुरी चाचू साथ घूमने कैसे जाएगी तो वो कहतीं - '' थीक हो जायेगा '' 














Tuesday, September 13, 2011

No photoz Please......मैडम का मूड नहीं है !

निराली बिटिया की निराली बातें ....! अब वो दिन हवा हुए जब बेटी के मनचाहे फ़ोटोज़ और मनभावन पोजेज़ निकल लेना हमारे बाएं हाथ का खेल हुआ करता था.अब तो बेटी की फोटो खींचना एक टेढ़ी खीर हो चुका है.
जहां हमने कैमरा निकला ... कहानी शुरू...
अव्वल तो कैमरा पंखुरी को चाहिए होता है. जीहाँ, बिटिया आजकल डिज़िटल कैमरे से खूब फ़ोटोग्राफ़ी कर रही हैं तो कैमरा देखते ही उन्हें चाहिए होता है ...
उसके बाद अगर मूड बिगड़ा तो पीठ कैमरे की ओर.... और सीधा जवाब -
 '' पोतो नईं '' 
फिर उसके बाद तो आप मानते रहिये मैडम को ...नहीं मतलब नहीं...
बात साबित करने के लिए तस्वीर के साथ सबूत भी पेश है...कल शाम बुआ ने बेटी की फोटो खींचनी चाही...मैडम का मन नहीं था...लेकिन फिर भी जब बुआ ने फोटो लेने की ज़िद नहीं छोड़ी तो देख लीजिये बेटी के अंदाज़...
कैमरा क्लिक होता रहा...फ्लेश चमकता रहा...और मैडम पूरे मामले को वैसे ही इग्नोर करती रहीं जैसे सेलिब्रिटीज़ करती हैं.









अब बेटी को गुस्सा आ रहा था ...उन्होंने हाथ दिखा कर बुआ से कहा
'' बछ  ''....

और फिर अपनी बुक पर झुक गयीं....
फिर ..... फिर क्या कैमरा ऑफ़ ....काम ख़त्म !!!!