हमारी नन्ही परी

हमारी नन्ही परी
पंखुरी

Thursday, March 3, 2011

येम्माराऽऽऽऽऽ पचासा...... half century !!!

अगर आप सब सिर्फ क्रिकेट में सचिन ,सहवाग या युवराज  के  बनाये  अर्धशतक  को ही important मानते हैं तो जान लीजिये कि ये वाली हाफ सेंचुरी भी उससे कम इम्पार्टेंट नहीं . आखिर ये बिटिया के अखबार पंखुरी Times की पचासवीं पोस्ट जो है भई. 
पंखुरी की मासूम शरारतों , मस्तियों , कारनामों , बातों और किस्सों से भरी ये सारी पोस्टें जो गवाह बनीं हैं बेटी के मासूम बचपन की और जिन्हें सराहा और ढेर सा प्यार दिया है आप सबने भी ... तो हुई न ये बहुत-बहुत ख़ास बात ! 
तो लीजिये इस बार की इस बेहद स्पेशल पोस्ट में ये बेहद स्पेशल रिपोर्ट ख़ास आप सबके लिए . दिन रविवार, सत्ताइस फ़रवरी को पंखुरी ने बनारस में हुई एक बहुत अच्छी इवेंट में हिस्सा लिया . श्री कृष्ण बनीं ,गोल्ड मेडल पाया और अगले दिन अखबारों में खूब कवरेज भी हुई .इस पूरी इवेंट में पंखुरी सेंटर ऑफ़ अट्रेक्शन बनीं रहीं और खूब मस्तियाँ की . आप भी देखिये ----  
शो से पहले
मुरलीधर 
राधा संग कृष्णा
 शो से पहले बुआ और चाचू की बेस्ट विशेज़

स्टेज पर आत्मविश्वास  
इस रूप में बिटिया को पहचान रहें हैं न आप :)

अखबार में बेटी की चर्चा

बेटी का गोल्ड मेडल 

 वैसे आपके लिए ये जानना भी बहुत इंट्रेस्टिंग रहेगा कि इस प्रोग्राम में पंखुरी बेटी दूसरी बार हिस्सा ले रहीं थीं . पिछले बार सवा साल की उम्र में से  बेटी पहली बार श्री कृष्ण बन कर स्टेज पर गयीं थीं . लेकिन तब उनका ये ब्लॉग नहीं था तो आपसे वो अनुभव हम नहीं बाँट सके थे . ये रही पिछले साल दैनिक जागरण में छपी उनकी फ़ोटो, पहचानिए तो सही ....

हांजी , साईं बाबा के बगल में खड़े सबसे नन्हे बाल कृष्ण, यही तो हैं हमारी प्यारी बिटिया ! पहली बार स्टेज पर in 2010 .

 तो रही न ये पचासवीं पोस्ट बहुत-बहुत स्पेशल ...! आपको कैसी लगी हमें ज़रूर बताइयेगा :)

Tuesday, March 1, 2011

टाई लगा के माना ...

ये टाई चाचू की है ...लेकिन इस पर चाचू से ज़्यादा पंखुरी बेटी का अधिकार है , जब उनका जी चाहे .... कोई शक  :)
इश्टाइल में रहने का... !
क्या हुआ... अगर टाई थोडी अधिक लम्बी है....ही-ही-ही
बस पोज़ सही होना चाहिये ... है न !!

Monday, February 28, 2011

पंखुरी और बाबूदाय...!

क्या आप जानते हैं बाबूदाय कौन है ? क्या आपने कभी बाबूदाय को देखा है ? क्या कहा ...? नहीं ....! एल्लो ... हमारी पंखुरी बेटी की तो बाबूदाय से खूब अच्छी जान-पहचान हो गयी है और उसे छू कर भी देखती हैं . लिटिल कन्फ्यूज़न .... तो लीजिये भी हम आपका कन्फ्यूज़न दूर किये देते हैं . अरे भई...जिसे हम आप बड़े लोग  बछड़ा कहते हैं न, वही तो है पंखुरी बेटी का बाबूदाय ...मतलब गाय का बाबू ....मतलब गाय का बच्चा !

अब देखिये बेटी और उनके बाबूदाय की कुछ प्यारी फ़ोटोज़ 








Thursday, February 24, 2011

Pankhuri's TOP TEN songs List...!

ये तो सभी को पता है कि पंखुरी बेटी संगीत और डांस की खास शौकीन हैं.खुद गाना और नाचना साथ ही सबको नाचने गाने के किये प्रेरित करना उन्हें खूब आता है .अब बेटी ने अपने पसंद के दस सुपर-डुपर हिट गानों की लिस्ट भी तैयार कर ली है जिसे वो रोज़ बिना भूले एक बार ज़रूर सुनती हैं बाकायदा फरमाइश करके.
लीजिये आप भी एक नज़र डालिए उनकी लिस्ट पर और जल्दी से बताइए कि इनमें से कोई गाना आपकी पसंद का है क्या ??

१.  मिन्नी-मिन्नी (मुन्नी बदनाम हुई ) 
२. हत्ते-हत्ते लोउ-लोउ (रोते-रोते हँसना सीखो, हँसते-हँसते रोना)
३. दूद्दू  बाता (दूध में बताशा - लल्ला-लल्ला लोरी)
४. एप्पी बद्दे ती उ (दुनिया कहती हैप्पी बर्थडे टू यू- हम भी अगर बच्चे   होते... )
५. बाबा तिप (बाबा ब्लैक शिप)
६. तुंकिल-तुंकिल (ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार)
७. पापा -दीदी (सारे के सारे ग म को लेकर गाते चले) 
८. मामा पेंत ( बन्दर मामा पहन पैजामा)
९. मिंदा ... (चंदा मामा दूर के)
१०. पापा नो पापा (इटिंग शुगर नो पापा)

इनमें से पहला गाना बेटी ओरिजनल ट्रैक पर सुनना पसंद करती हैं बाकी के नौ गाने रोज़ बुआ ऑफिस से लौट कर बिटिया की फरमाइश पर लाइव  सुनाती है... और हाँ ये सारे गाने बिटिया को याद हैं . कोई गड़बड़ होने पर  वो बुआ को तुरंत सही भी करती हैं .
सावधान ..
विश्राम ....

Thursday, February 17, 2011

पिछले साल पंखुरी बेटी सिर्फ सवा साल की थीं जब वसंत पंचमी का त्यौहार आया था तो बस पापा के साथ ही घूमना टहलना हो पाया था लेकिन इस बार बिटिया ने खुद पे-पे (पैर-पैर) घूम के आनंद लिया . बेटी के साथ उनकी तनु दीदी और दूसरे friends भी थे . बेटी ने इस दिन पीली ड्रेस पहनी थी और हाँ कुछ देर के लिए सिर पर बसंती चूनर डाले बेटी सचमुच  बसंती  बन गयी थीं . ये रही उस दिन की फ़ोटो-रिपोर्ट ---- 

 

नन्ही लाल चुन्नी की मस्ती :)

क्या आपने बचपन में नन्ही लाल चुन्नी की कहानी पढी है ? कल पंखुरी बेटी वैसी ही चुन्नी-मुन्नी बनी थीं. सुबह उठ कर पहले तो काफ़ी देर तक अपनी पेन्तू (पैंट) नही पहनने की ज़िद करके चाचू का बारामूडा पहन कर टहलती रहीं फिर नहाने के बाद जब बारामूडा उतारा तो कुछ देर के लिये लाल टावेल लपेट कर नन्ही लाल चुन्नी के गेटअप में आ गयीं. आप भी देखिये उनका ये कारनामा ....